Saturday, 16 September 2017

गज़ल बारिश मे अपनी आँखो का पानी .

तूझे  प्यार कर बैठि इसमें गुनाह क्या
बता सवारें इसमे मॆरी खता  क्या

मुझे जो भी भाया वही तुम थे करते
मॆरी आँसुओं पर तुम थे मचलते
हुआ क्या जो तुमने हाथ छुड़ाया
मुझे प्यार करने का तोहमत लगाया

तुझे प्यार कर बैठी इसमे गुनाह क्या
बता सवारें इसमे मेरी खता  क्या

मोहब्बत मे हमने ऐसी चोट खायी
 ज़माने से हमको मिली रुसवाई
तुम्हारे  लिये मैने जग को भुलाया
तुझे देखकर यादें फिर घिर आयी

तुझे प्यार कर बैठी इसमे गुनाह क्या
बता सवारें इसमे मेरी खता क्या .




vinita pandey .🙏😊


11 comments:

Manisha Chaubey said...

Vry nce dear ☺all the best for next👍

Raj Pandey said...

Very nice gazal all the best

Omkar Agale said...

Very nice Gazal all the best for the next gazal

Akash Sawant said...

Nic vinta di....all the best for u r all blogs...✌��

Satyendra Nath Pandey said...

Very nyc sister

Shashi hatekar said...
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Unknown said...
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sushma pandey said...

Niz..keep it up..

sushma pandey said...

Niz..keep it up..

Tiwari Shukla said...

Bahut Khoob Pandey Ji aapki Ke ek ek line Dil Ko Chu Jati Hai

Anonymous said...

Reminded me of old good days! Cheers

9svini.com

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