Thursday, 15 November 2018

WAQT

वक्त की पोटली  



गुजरते  हुए  हालत  को  हम बया  कैसे  करे 

जख्मों की आगाज  को दिल बया कैसे करें 

कब थी हमको  आश उनसे कब थी हमकों  बेरुखी 

आज फिर हालत से घायल जुबाँ कैसे कहे 

लोग दिल बदलतें  हैं जैसे करवट रातों की 

हम नादान ये भी ना समझें दुनियाँ दस्तूरे कभी 

अब बया कैसे करे आगाज दिल दर्दे सभी 




 रस्मों रिवाजों में दबी आँह  भी अंजाम भी 

हमने सब सँजोय लिया वक्त की ये पोटली 


अब बया कैसे करे आगाज दिल दर्दे सभी   






                                            विनिता  पाण्डेय --

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